युद्ध का वृत्तांत
एक नई कथा लिखी जा रही है: हमारा नायक 48वीं मंज़िल पर कनिष्ठ विजेता को चुनौती देता है।
24 चालों के बाद भी धूल अभी नहीं बैठी।
हमारा नायक तब तक टिका रहता है जब तक कनिष्ठ विजेता की घड़ी शून्य नहीं हो जाती।
लोड हो रहा है…
चाल दर चाल युद्ध
चालों का अभिलेख पुनर्निर्मित नहीं हो सका, पर युद्ध की गूँज अभी भी कालकोठरी में लटकी है।
हमारा नायक तब तक टिका रहता है जब तक कनिष्ठ विजेता की घड़ी शून्य नहीं हो जाती।