युद्ध का वृत्तांत
द्वंद्व शुरू: 41वीं मंज़िल पर हमारा नायक बनाम प्रहरी।
युद्ध 45 चालों तक खिंचता है।
प्रहरी हमारा नायक के शह-मात के सामने गिरता है। कथा और बढ़ती है।
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चाल दर चाल युद्ध
चालों का अभिलेख पुनर्निर्मित नहीं हो सका, पर युद्ध की गूँज अभी भी कालकोठरी में लटकी है।
अंत में, हमारा नायक शह-मात देता है और प्रहरी बिसात से भाग जाता है।