युद्ध का वृत्तांत

हमारा नायक कनखजूरा के सामने मोहरे बिछाता है। कालकोठरी चुपचाप देखती है।

युद्ध 39 चालों तक खिंचता है।

कनखजूरा हमारा नायक के शह-मात के सामने गिरता है। कथा और बढ़ती है।

लोड हो रहा है…

चाल दर चाल युद्ध

चालों का अभिलेख पुनर्निर्मित नहीं हो सका, पर युद्ध की गूँज अभी भी कालकोठरी में लटकी है।

अंत में, हमारा नायक शह-मात देता है और कनखजूरा बिसात से भाग जाता है।