युद्ध का वृत्तांत
द्वंद्व शुरू: 49वीं मंज़िल पर हमारा नायक बनाम सेनापति।
28 चालों के बाद भी धूल अभी नहीं बैठी।
शह-मात। सेनापति इस मंज़िल पर हमारा नायक को हराता है।
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चाल दर चाल युद्ध
चालों का अभिलेख पुनर्निर्मित नहीं हो सका, पर युद्ध की गूँज अभी भी कालकोठरी में लटकी है।
हमारा नायक सेनापति के शह-मात के सामने गिरता है। कालकोठरी क्षमा नहीं करती।