युद्ध का वृत्तांत
हमारा नायक घायल शैतान के सामने मोहरे बिछाता है। कालकोठरी चुपचाप देखती है।
9 चालों के बाद भी धूल अभी नहीं बैठी।
शह-मात। घायल शैतान इस मंज़िल पर हमारा नायक को हराता है।
लोड हो रहा है…
चाल दर चाल युद्ध
चालों का अभिलेख पुनर्निर्मित नहीं हो सका, पर युद्ध की गूँज अभी भी कालकोठरी में लटकी है।
हमारा नायक घायल शैतान के शह-मात के सामने गिरता है। कालकोठरी क्षमा नहीं करती।