युद्ध का वृत्तांत

हमारा नायक चूहा के सामने मोहरे बिछाता है। कालकोठरी चुपचाप देखती है।

युद्ध 129 चालों तक खिंचता है।

ड्रॉ। कालकोठरी हमारा नायक और चूहा के नाम संजोती है।

लोड हो रहा है…

चाल दर चाल युद्ध

चालों का अभिलेख पुनर्निर्मित नहीं हो सका, पर युद्ध की गूँज अभी भी कालकोठरी में लटकी है।

न हमारा नायक और न चूहा विजय पाते हैं। बिसात पर ड्रॉ।