युद्ध का वृत्तांत

हमारा नायक भ्रष्ट वनदेवी के सामने मोहरे बिछाता है। कालकोठरी चुपचाप देखती है।

हमारा नायक को भागने के लिए मजबूर होना पड़ता है। भ्रष्ट वनदेवी मैदान पर कब्ज़ा करता है।

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चाल दर चाल युद्ध

चालों का अभिलेख पुनर्निर्मित नहीं हो सका, पर युद्ध की गूँज अभी भी कालकोठरी में लटकी है।

हमारा नायक को भागने के लिए मजबूर होना पड़ता है। भ्रष्ट वनदेवी मैदान पर कब्ज़ा करता है।