युद्ध का वृत्तांत
एक नई कथा लिखी जा रही है: हमारा नायक 12वीं मंज़िल पर ज़ॉम्बी को चुनौती देता है।
54 चालों के बाद भी धूल अभी नहीं बैठी।
शह-मात। ज़ॉम्बी इस मंज़िल पर हमारा नायक को हराता है।
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चाल दर चाल युद्ध
चालों का अभिलेख पुनर्निर्मित नहीं हो सका, पर युद्ध की गूँज अभी भी कालकोठरी में लटकी है।
हमारा नायक ज़ॉम्बी के शह-मात के सामने गिरता है। कालकोठरी क्षमा नहीं करती।