युद्ध का वृत्तांत
हमारा नायक स्लग के सामने मोहरे बिछाता है। कालकोठरी चुपचाप देखती है।
हमारा नायक की घड़ी शून्य पर पहुँचती है। स्लग जीत का जश्न मनाता है।
लोड हो रहा है…
चाल दर चाल युद्ध
चालों का अभिलेख पुनर्निर्मित नहीं हो सका, पर युद्ध की गूँज अभी भी कालकोठरी में लटकी है।
हमारा नायक की घड़ी शून्य पर पहुँचती है। स्लग जीत का जश्न मनाता है।