युद्ध का वृत्तांत
हमारा नायक सहचर आत्मा के सामने मोहरे बिछाता है। कालकोठरी चुपचाप देखती है।
21 चालों के बाद भी धूल अभी नहीं बैठी।
सहचर आत्मा का समय समाप्त। हमारा नायक खेल जीतता है।
लोड हो रहा है…
चाल दर चाल युद्ध
चालों का अभिलेख पुनर्निर्मित नहीं हो सका, पर युद्ध की गूँज अभी भी कालकोठरी में लटकी है।
सहचर आत्मा का समय समाप्त। हमारा नायक खेल जीतता है।